साहब, 24 गाय पकड़ी है. छोडो..जलेबी खानो दो…ऐसी है योगी की पुलिस
दो दर्जन गाय हो या दो सौ। किसी और को बता दो.. अभी तो जलेबी खाने का टाइम है।इतना कहने के बाद पुलिस अफसर फिर जलेबी परर टूट पड़े।
दो दर्जन गाय हो या दो सौ। किसी और को बता दो.. अभी तो जलेबी खाने का टाइम है।इतना कहने के बाद पुलिस अफसर फिर जलेबी परर टूट पड़े।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी मुश्किल पुलिस है। योगी के लाख चाहने के बाद भी पुलिस अफसर सुधरने का नाम नहीं ले रहा। योगी अब तक 100 से ज्यादा आईपीएस अफसरों का तबादला कर चुके हैं। 200 से ज्यादा डीएसपी रैंक के अधिकारी बदले जा चुके हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में अब भी कानून का राज स्थापित नहीं हो पाया है। हापुड़ में जो हुआ उसे जानकर आप और योगी आदित्यनाथ दोनों समझ जाएंगे आखिर कमी कहां है।
हापुड़ जिले में पुलिस ने गाय से भरा एक कंटेनर पकड़ा। बाहर से ये कंटेनर एक नामी दूध कंपनी का लगता था, लेकिन इसके अंदर 30 गाय और बछड़े बंद थे। खबर ये थी कि उन्हें हापुड़ के रास्ते संभल ले जाया जा रहा था। लेकिन गांव के लोगों की मदद से पुलिस ने इसे पकड़ लिया। ऐसे वक्त में ये हुआ जब पुलिस की वाहवाही हो सकती थी, केंद्र सरकार के नए कानून आने के बाद पुलिस ने 24 गाय को बचाया था। लेकिन हुआ उल्टा और ये हुआ पुलिस अफसर के रवैये से। गाय पकड़े जाने की खबर हापुड़ जिले के एडिश्नल एसपी राम मोहन सिंह को दी गई। होना तो ये चाहिए था कि एडिश्नल एसपी साहब फौरन एक्शन में आते, गाय पकड़ने वाली टीम को बधाई देते और मुजरिम की खबर लेते। लेकिन शायद टाइमिंग गलत थी।
जब ये खबर एएसपी साहब को मिली उस वक्त वो नाश्ता कर रहे थे। अभी अभी उन्होंने गरम गरम जलेबी और ठंडी ठंडी कोल्ड ड्रिंक का सेवन शुरू किया था। अब गाय देखने जाते तो जलेबी ठंडी हो जाती और कोल्ड ड्रिंक गरम। मीडिया वाले सीधे एसपी साहब के कमरे में आ गए। उन्होंने एसपी साहब से तुरंत बयान देने को कह दिया। बड़े मजे में एएसपी राममोहन सिंह ने कहा, दो दर्जन गाय हो या दो सौ। किसी और को बता दो.. अभी तो जलेबी खाने का टाइम है। इतना कहने के बाद पुलिस अफसर फिर जलेबी परर टूट पड़े। उन्हें क्या पता था, उनकी ये बात भी मीडिया के कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। योगी आदित्यनाथ ने टीवी पर अपने पुलिस अफसर की बात सुनी होगी, पूरी उम्मीद है कि उइस अफसर पर एक्शन होगा। इनका भी तबादला हो सकता है। लेकिन योगीजी को ये सोचना चाहिए की इस पुलिसिया बीमारी का इलाज तबादला या निलंबव नहीं है। ऐसा लगता है जैसे पूरा सिस्टम ही बैठ गया है। इसे सुधारने के लिए सर्जरी करनी पड़ेगी।



